सहस्रदीपें दीप कैसी प्रकाशली प्रभा
देवता: श्री कृष्ण
मूल पाठ
पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।
सहस्रदीपें दीप कैसी प्रकाशली प्रभा ।
उजळल्या दशदिशा गगना आलीसे शोभा ॥ १॥
कांकड आरति माझ्या कृष्ण सभागिया ।
चराचर मोहरलें तुझी मूर्ती पहाया ॥ धृ॥
कोंदलेंसे तेज प्रभा झालीसे एक ।
नित्य नवा आनंद ओंवाळितां श्रीमुख ॥ २॥
आरति करितां तेज प्रकाशलें नयनीं ।
तेणें तेजें मीनला एका एकीं जनार्दनीं ॥ ३॥
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