श्री गणेश जी की आरती — शेंदुर लाल
शेंदुर लाल चढ़ायो — गोसावीनंदन
मूल पाठ
पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।
अर्थ
गोसावीनंदन की यह आरती महाराष्ट्र में "सुखकर्ता दुःखहर्ता" के तुरंत बाद गाई जाती है।
१. गजमुख गणेश को सुंदर लाल सिंदूर चढ़ाया गया है। गौरी-शंकर के बड़े पेट वाले लाड़ले पुत्र शोभा दे रहे हैं। देवताओं के स्वामी हाथ में गुड़ के लड्डू लिए हैं। उनकी महिमा कही नहीं जा सकती; मैं उनके चरणों में लगता हूँ।
धृपद: हे गणराज, विद्या और सुख देने वाले, आपकी जय हो। आपका दर्शन धन्य है; मेरा मन उसमें रम जाता है।
२. आठों सिद्धियाँ आपकी दासी हैं और आप संकटों के शत्रु हैं। विघ्नों का नाश करने वाली आपकी मंगल मूर्ति सर्वाधिकारी है। आपकी छवि करोड़ों सूर्यों जैसी तेजस्वी है; आपके मस्तक पर चंद्रमा शोभा देता है।
३. जो कोई भाव-भक्ति से शरण आता है, उसे संतान और संपत्ति भरपूर मिलती है। हे महाराज, ऐसे आप मुझे अति प्रिय हैं। गोसावीनंदन रात-दिन आपके गुण गाते हैं।
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