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जय श्रीअनंता लक्ष्मीकांता

अनंत की आरती

देवता: श्री अनंत

मूल पाठ

पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।

जय श्रीअनंता लक्ष्मीकांता आरती ओवाळू । भक्तां संकट पडतां धावे अनंत कनवाळू ॥ धृ ॥ भाद्रपदमासी शुक्ल चतुर्दशी तव व्रत नेमाने । दुकूलदोरक करुनि पूजिति अनंत नामानें ॥ १॥ नानापरिची पुष्पें द्रव्ये तुजला अर्पीती । षोडशपूजा करूनी द्वाह्यण संतर्पण करिती ॥ २॥ अपूप वायान दंपतिपूजन त्या दिवशी करिती । अनंत सन्तुष्टोनि देती संतति संपत्ती ॥ ३॥ रामा धर्मे आचरीतां व्रत क्लेशांतुनि सुटला । कौंडिण्याने पुजितां तुजला उद्धरिले त्याला ॥ ४॥ मोरेश्वरसुत वासुदेव हा तिष्ठत सेवेसी । संकटकाळी रक्षी अनंता आपुल्या दासासी ॥ ५॥

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