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शनी ग्रह मंत्र

बीज, नाम, पौराणिक व वैदिक मंत्र — शनिवारी व साडेसातीत जप

देवता: नवग्रह — शनी

मूल पाठ

पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥ ॐ शं शनैश्चराय नमः ॥ नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् । छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ॥ ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये । शं योरभि स्रवन्तु नः ॥

अर्थ

वर तीन प्रकारचे मंत्र आहेत — बीज मंत्र, नाम मंत्र आणि नवग्रह स्तोत्रातील श्लोक. जपासाठी यापैकी एक निवडावा. श्लोकाचा अर्थ: निळ्या अंजनासारखी कांती असलेला, सूर्याचा पुत्र, यमाचा मोठा भाऊ, छाया आणि सूर्य यांच्यापासून जन्मलेल्या शनैश्चराला मी नमस्कार करतो. शेवटचा ऋग्वेदातील मंत्र (शं नो देवीः) शनी शांतीसाठी म्हणतात — दिव्य जल आमच्या कल्याणासाठी व पानासाठी सुखकारक होवो आणि आमच्यावर सुख-शांतीचा वर्षाव करो.

लाभ

  • शनिवारी जप
  • साडेसाती व शनी ग्रहशांतीसाठी
  • धैर्य व संयम

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नवग्रह — मंत्र

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