पितृपक्ष श्राद्ध
पूर्वजों का तर्पण — पितृ ऋण चुकाने की पवित्र विधि
₹2,000 – ₹5,000
2 से 3 घंटे
पूजा के बारे में
पितृपक्ष में किए गए श्राद्ध से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोजन और दान श्राद्ध की मुख्य विधियाँ हैं। पिंड कुश पर अर्पित किए जाने वाले तिल और चावल के गोले होते हैं। गया श्राद्ध, त्रिपिंडी श्राद्ध और नांदी श्राद्ध विशेष प्रकार हैं। परिवार में पितृदोष हो — अकाल मृत्यु, विवाह न होना, संतान न होना — तो श्राद्ध अवश्य करें। पूर्वजों के स्मरण से परिवार की परंपरा बनी रहती है।
लाभ
- पितृदोष दूर होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है
- परिवार में अकाल मृत्यु कम होती है
- वंश वृद्धि और कुल का नाम बना रहता है
- आर्थिक प्रगति और समृद्धि
- विवाह और करियर की बाधाएँ दूर
- मन की शांति और आत्मिक संतोष
पूजा सामग्री
- तिल (काले, सफ़ेद)
- कुश
- चावल का आटा
- पीतल की थाली
- गंगाजल
- दूध
- शहद
- सफ़ेद फूल
- दर्भ
- सुपारी
- पान के पत्ते
- धूप-दीप
- गाय और कौवे के लिए भोजन
अनुमानित कीमत₹2,000 से
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