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घालीन लोटांगण — आरती के बाद की प्रार्थना

सभी आरतियों के बाद गाई जाने वाली प्रार्थना

मूल पाठ

पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।

घालीन लोटांगण वंदीन चरण । डोळ्यांनी पाहीन रूप तुझे । प्रेमे आलिंगन आनंदे पूजिन । भावे ओवाळीन म्हणे नामा ॥ १ ॥ त्वमेव माता च पिता त्वमेव । त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव । त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥ २ ॥ कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा । बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात् । करोमि यद्यत्सकलं परस्मै । नारायणायेति समर्पयामि ॥ ३ ॥ अच्युतं केशवं रामनारायणं । कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् । श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं । जानकीनायकं रामचंद्रं भजे ॥ ४ ॥ हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे । हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ॥ ५ ॥

अर्थ

सभी आरतियों के बाद, मंत्रपुष्पांजलि से पहले यह प्रार्थना गाई जाती है। पहला पद संत नामदेव का (मराठी) है और आगे के श्लोक संस्कृत शास्त्र-वचन हैं।

१. मैं साष्टांग प्रणाम करूँगा, आपके चरणों की वंदना करूँगा और आँखें भरकर आपका रूप देखूँगा। प्रेम से आलिंगन करूँगा, आनंद से पूजा करूँगा और भाव से आरती उतारूँगा — ऐसा नामदेव कहते हैं।

२. हे देवों के देव, आप ही मेरी माता, आप ही पिता, आप ही बंधु और आप ही सखा हैं। आप ही मेरी विद्या और आप ही मेरा धन हैं — आप ही मेरे सब कुछ हैं।

३. शरीर से, वाणी से, मन से, इंद्रियों से, बुद्धि से, आत्मा से या स्वभाव से मैं जो कुछ भी करता हूँ, वह सब परमात्मा नारायण को समर्पित करता हूँ।

४. अच्युत, केशव, राम, नारायण, कृष्ण, दामोदर, वासुदेव, हरि, श्रीधर, माधव, गोपिकावल्लभ और जानकीनायक रामचंद्र — इन नामों से मैं भगवान का भजन करता हूँ।

५. यह महामंत्र राम और कृष्ण के नामों का जप है।

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