येई हो विट्ठले — आरती
विट्ठल को पुकार — संत नामदेव
मूल पाठ
पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।
येई हो विठ्ठले माझे माउली ये ।
निढळावरी कर ठेवुनि वाट मी पाहे ॥ धृ. ॥
आलिया गेलिया हाती धाडी निरोप ।
पंढरपुरी आहे माझा मायबाप ॥ १ ॥
येई हो विठ्ठले ॥
पिवळा पीतांबर कैसा गगनी झळकला ।
गरुडावरी बैसोनि माझा कैवारी आला ॥ २ ॥
येई हो विठ्ठले ॥
विठोबाचे राज्य आम्हा नित्य दिपवाळी ।
विष्णुदास नामा जीवेंभावें ओवाळी ॥ ३ ॥
येई हो विठ्ठले ॥
Yei Ho Vitthale Maze Mauli Ye,
Nidhalavari Kar Thevuni Vat Mi Pahe. ॥ Refrain ॥
Aliya Geliya Hati Dhadi Nirop,
Pandharpuri Ahe Maza Maybap. ॥ 1 ॥
Yei Ho Vitthale ॥
Pivala Pitambar Kaisa Gagani Zalakala,
Garudavari Baisoni Maza Kaivari Ala. ॥ 2 ॥
Yei Ho Vitthale ॥
Vithobache Rajya Amha Nitya Dipavali,
Vishnudas Nama Jivebhave Ovali. ॥ 3 ॥
Yei Ho Vitthale ॥
अर्थ
संत नामदेव की यह आरती विट्ठल को माँ (माउली) की तरह प्रेम से पुकारती है; विट्ठल की आरती के बाद यह अवश्य गाई जाती है।
धृपद: हे विट्ठल, मेरी माँ, आइए। माथे पर हाथ रखकर मैं आपकी राह देख रहा हूँ।
१. आने-जाने वाले हर व्यक्ति के हाथ मैं संदेश भेजता हूँ — मेरे माता-पिता पंढरपुर में हैं।
२. देखो, आकाश में पीला पीतांबर चमका! गरुड़ पर बैठकर मेरे रक्षक आ गए।
३. विठोबा के राज्य में हमारी रोज़ दीवाली है। विष्णु के दास नामदेव मन से, प्राण न्योछावर करके आरती उतारते हैं।
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