विवाह मुहूर्त — ज्योतिषीय दृष्टिकोण और शुभ नक्षत्र
हिंदू विवाह में मुहूर्त तय करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सही मुहूर्त पर विवाह होने से वर-वधू का जीवन सुखी, समृद्ध और दीर्घ होता है। ज्योतिष के अनुसार मुहूर्त तय करते समय ये बातें देखी जाती हैं।
शुभ तिथियाँ
द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी विवाह के लिए शुभ हैं। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या टालें।
शुभ नक्षत्र
रोहिणी — सर्वोत्तम, मृगशिरा — दूसरे स्थान पर, उत्तरा फाल्गुनी — विशेष शुभ, हस्त — शुभ, चित्रा — सुंदर, स्वाति — उत्तम, उत्तराषाढ़ा — श्रेष्ठ, उत्तरा भाद्रपद — शुभ, रेवती — शुभ।
शुभ वार
सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार शुभ हैं। मंगलवार और शनिवार यथासंभव टालें।
वर्जित काल
भद्रा, राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल — इन समयों में विवाह विधि न करें। अधिक मास, अशौच काल और गुरु-शुक्र अस्त के समय भी विवाह टालें।
कुंडली मिलान
अष्टकूट पद्धति से 36 गुण मिलाए जाते हैं — वर्ण (1), वश्य (2), तारा (3), योनि (4), ग्रह मैत्री (5), गण (6), भकूट (7), नाड़ी (8)। कम से कम 18 गुण मिलना आवश्यक है।
मंगल दोष
वर या वधू में से किसी एक की कुंडली में मंगल दोष हो तो दोनों में होना चाहिए। न हो तो नवग्रह शांति के बाद विवाह हो सकता है।
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