कालसर्प दोष — संपूर्ण जानकारी, लक्षण और उपाय
कालसर्प दोष आधुनिक ज्योतिष का एक बहुचर्चित विषय है। नीचे दी गई पूरी जानकारी पढ़ें और अनावश्यक डर न रखें।
कालसर्प दोष क्या है
जब जन्म कुंडली में सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब यह दोष बनता है। ग्रह राहु से केतु की दिशा में हों तो अनुलोम कालसर्प, विपरीत दिशा में हों तो विलोम कालसर्प।
बारह प्रकार के कालसर्प दोष
अनंत, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर, शेषनाग — हर प्रकार के अलग परिणाम और उपाय होते हैं।
लक्षण
जीवन में लगातार संघर्ष और असफलता, विवाह में देरी, संतान प्राप्ति में कठिनाई, आर्थिक अस्थिरता, साँपों के सपने आना, मानसिक अशांति।
उपाय
त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प शांति सबसे उत्तम उपाय है। नागपंचमी पर नाग देवता पूजा, महामृत्युंजय जाप (रोज़ 108 बार), रुद्राभिषेक और घर में कालसर्प शांति यंत्र रखना — ये उपाय प्रभावी हैं। VedPurohit के पुरोहितों से अपनी कुंडली जँचवाकर सही उपाय जानें।
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