उपनयन संस्कार (जनेऊ)
द्विजत्व संस्कार — गायत्री दीक्षा और ब्रह्मचर्य का आरंभ
₹5,000 – ₹12,000
4 से 5 घंटे
पूजा के बारे में
उपनयन संस्कार, जिसे जनेऊ भी कहते हैं, हिंदू संस्कारों में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है; यह 7 से 11 वर्ष की आयु में किया जाता है। इस दिन बालक यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण करता है और उसे गायत्री मंत्र की दीक्षा दी जाती है। संस्कार में ब्रह्मचारी का भिक्षा माँगना, गुरु के पास अध्ययन का संकल्प और दैनिक आचरण सिखाना शामिल है। गायत्री मंत्र के नित्य पाठ से बुद्धि, तेज और ज्ञान बढ़ता है।
लाभ
- ब्रह्मतेज और तेजस्विता
- गायत्री जाप से बुद्धि और ज्ञान बढ़ता है
- संयम, अनुशासन और नैतिक मूल्य
- पूर्वजों का आशीर्वाद और देव-ऋण से मुक्ति
- पढ़ाई और करियर में सफलता
- आत्मबल और आत्मविश्वास
पूजा सामग्री
- यज्ञोपवीत (जनेऊ)
- पीला वस्त्र
- दंड
- मेखला
- मृगचर्म
- पल्ली
- भिक्षापात्र
- घी
- समिधा
- हवन कुंड
- अक्षत
- नारियल
- फूल
- फल
अनुमानित कीमत₹5,000 से
यह पूजा बुक करें