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मूळपीठ यमुनागारी

रेणुका (माहूर) देवी की आरती

देवता: श्री रेणुका

मूल पाठ

पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।

मूळपीठ यमुनागारी । माता आदिकुमारी ॥ नेसली पितांबर उभा राहे शिखरीं । भक्ताचीं वाट पाहे ॥ कर निढळावरी ॥ १ ॥ जय देवी आदिमातें ॥ जय हो कृपावंते ॥ आरती ओवाळीन । एक मनोभावे चित्तें ॥ धृ. ॥ मळवट कस्तुरीचा । गळा हार रत्नांचा ॥ त्रिशूळ डमरू हातीं । गर्व हरिला दैत्यांचा ॥ वधिला महिषासुर । थोर प्रताप भूजांचा ॥ जय. ॥ २ ॥ शृंगार जडित लेणे । कटडियांची भूषणे ॥ अंदुवा झणत्कार । ढाळ देती रत्नांचा ॥ पाईचे पोल्हार । वाजती रुणझुण ॥ जय. ॥ ३ ॥ वळली हे कामधेनू । पय दाटले स्तनी ॥ अगम्य महिमा तुझा । वर्णिती वेदपुराणी ॥ यालागी माते चरणी । शरण आलो लोटांगणी ॥ जय. ॥ ४ ॥ तव रूप वर्ण अंबा । माझा केवढा केवा ॥ वर्णितां मोक्ष होय । भक्त चरणी राखावा ॥ वेडा हा विप्रदास । तुझें चरणीं असावा ॥ जय. ॥ ५ ॥

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