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जयदेव जयदेव श्रीमद्भागवता

भागवत की आरती

देवता: श्रीमद्भागवत

मूल पाठ

पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।

जयदेव जयदेव श्रीमद्भागवता । श्रवणें मननें पठणें भक्ती ये हाता ॥ धृ ॥ वेदाचें हें सार पाहे रसभरित । दशलक्षण हें आहे लक्षीत ॥ जय ॥ १॥ द्वादश स्कंधामध्यें हरीची लीळा । तिनशें पस्तिस अध्ये गाती गोपाळा ॥ जय ॥ २॥ अठरा सहस्र श्लोक गाती ऐकती । ज्यासी हरीभक्ती त्यासी तत्प्राप्ती ॥ जय ॥ ३॥ गायत्रीचें मंत्ररूप हें पाहें । परीक्षिति##-##शुकसंवाद आहे ॥ जय ॥ ४॥ भागवतरूपी देवा तूंचि अहेसी । करूं ही आरति एका##-##जनार्दनासी ॥ जय ॥ ५॥

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