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भक्तीचिये पोटी बोध कांकडा ज्योती

संत तुकाराम

देवता: काकड आरती

मूल पाठ

पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।

भक्तीचिये पोटीं बोध-कंकडा ज्योती । पंचप्राण जीवेंभावे ओंवाळूं आरती ॥ १ ॥ ओंवाळूं आरती माझ्या पंढरीनाथा । दोन्ही कर जोडूनि चरणी ठेविला माथा ॥ ध्रु. ॥ काय महिमा वर्णू आतां सांगणें तें किती । कोटी ब्रम्हहत्या मुख पाहतां जाती ॥ २ ॥ राई रखुमाबाई उभ्या दोन्ही दों बाहीं । मयूरपिच्छचामारें ढाळिती ठईंच्या ठाईं ॥ ३ ॥ विटेसहित पाय म्हणुनी भावे ओंवाळूं । कोटी रवी-शशी दिव्य उगवले हेळूं ॥ ४ ॥ तुका म्हणे दिप घेउनी उन्मनींत शोभा । विटेवरी उभा दिसे लावण्यगाभा ॥ ५ ॥

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