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उठा उठा हो साधक

काकड़ आरती

देवता: काकड आरती

मूल पाठ

पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।

उठा उठा हो साधक, साधा आपुलालें हित । गेला गेला हा नरदेह, मग कैचा भगवंत ॥ १ ॥ उठा उठा हो वेगेंशीं, चला जाउं राउळासी । झडतिल पातकांच्या राशी, काकडाआरती पहोनी ॥ ध्रु. ॥ जागे करा रुक्मिणीवरा, देव आहे निदसुरा । वेगें निंबलोण करा, इष्ट होईल म्हणऊनियां ॥ २ ॥ उठोनियां हो पांहाटे, पाहा विठ्ठल उभा विटे । चरण तयाचे गोमटे, अमृतदॄष्टी अवलोका ॥ ३ ॥ पुढें वाजंत्री वाजती, ढोल दमामे गर्जती । होत कांकडआरती, माझ्या पंढरीरायाची ॥ ४ ॥ सिंहनाद शंख-भेरी, गजर होतो महाद्वारीं । केशवराज विटेवरी, नामा चरण वंदितो ॥ ५ ॥

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