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अश्वपती पुसता झाला

वटसावित्री की आरती

देवता: सावित्री

मूल पाठ

पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।

अश्वपती पुसता झाला । नारद सांगताती तयाला ॥ अल्पायुषी सत्यवंत । सावित्रीनें कां प्रणीला ॥ आणखी वर वरी बाळें । मनि निश्चय जो केला ॥ आरती वडराजा ॥ १ ॥ दयावंत यमदूजा । सत्यवंत ही सावित्री ॥ भावें करीन मी पूजा । आरती वडराजा ॥ धृ. ॥ ज्येष्ठमास त्रयोदशी । करिती पूजन वडाशी ॥ त्रिरात्र व्रत करुनियां ॥ जिंकी तूं सत्यवंताशी ॥ आरती वडराजा ॥ २ ॥ स्वर्गावरी जाऊनियां । अग्निखांब कचळीला ॥ धर्मराज उचकला । हत्या घालील जीवाला ॥ येई गे पतीव्रते पती नेई गे आपुला । आरती वडराजा ॥ ३ ॥ जाऊनिया यमापाशीं । मागतसे आपल्या पती ॥ चारी वर देऊनिया । दयावंत द्यावा पती । आरती वडराजा ॥ ४ ॥ पतिव्रते तुझी कीर्ती ऎकूनि ज्या नारी ॥ तुझी व्रतें आचरती । तुझी भुवनें पावती ॥ आरती वडराजा ॥ ५ ॥ पतिव्रते तुझी स्तुती । त्रिभुवनी ज्या करिती ॥ स्वर्गी पुष्पवृष्टी करुनिया । आणिलासी आपला पती । अभय देऊनिया । पतिव्रते तारी त्यासी ॥ आरती वडराजा. ॥ ६ ॥

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