ही वेबसाइट मराठी मध्ये पाहायची? होय, बदला

जय देवी जय देवी जय तुळसी

तुलसी की आरती

देवता: तुळशी

मूल पाठ

पवित्र पाठ मूल भाषा में ही दिया गया है।

जय देवी जय देवी जय तुळसी । निजपत्राहुनि लघुतर त्रिभुवन हे तुळिसी ॥ धृ॥ ब्रह्मा केवळ मुळीं मध्यें तो शौरी । अग्रीं शंकर तीर्थें शाखा परिवारीं ॥ सेवा करिती भावें सकळहि नरनारी । दर्शनमात्रें पापें हरती निर्धारीं ॥ १॥ शीतळ छाया भूतळव्यापक तूं कैसी । मंजिरीची बहु आवड कमळारमणासी ॥ तव दलविरहित विष्णू राहे उपवासी । विशेष महिमा तुझा शुभ कार्तिकमासीं ॥ २॥ अच्युत माधव केशव पीतांबरधारी । तुझिया पूजनकाळीं जो हें उच्चारी ॥ त्यासी देसी संतति संपति सुखकारी । गोसावीसुत विनवी मजला तूं तारी ॥ ३॥

पूजा बुक करनी है?

अनुभवी, सत्यापित पंडित पूर्ण वैदिक विधि से पूजा करेंगे।

पूजा बुक करें

देवी — आरतियाँ

27 आरतियाँ
🙏

पुरोहित की प्रोफ़ाइल देखें

पुरोहित की पूरी प्रोफ़ाइल, जानकारी, सेवाएँ, फ़ोटो, समीक्षाएँ और उपलब्धता देखने और इन्हीं पुरोहित की पूजा बुक करने के लिए मुफ़्त खाता बनाएँ या लॉगिन करें।

VedPurohit ऐपपंचांग, आरती, पूजा बुकिंग और कुंडली — मोबाइल पर, इंटरनेट के बिना भी। ऐप डाउनलोड करें

WhatsApp पर मदद

खाता बनाए बिना पूछें — हमारी टीम WhatsApp पर जल्दी जवाब देगी।

किस बारे में मदद चाहिए?

कौन-सी पूजा, कब और कहाँ — हम सही पंडित और दक्षिणा बताएँगे।

संदेश ऐसा जाएगा
WhatsApp पर भेजें

"भेजें" दबाने पर यह संदेश WhatsApp में खुलेगा; वहाँ आप इसे बदल सकते हैं।